आर्यभट्ट की बायोग्राफी

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Aryabhatta Biography In Hindi: क्या आपने कभी सोचा है की हमारे देश को एक समय में विश्व गुरु क्यों कहा जाता है अगर आपके मन में भी यह सवाल है तो मैं आपको बता दूं की भारत में एक या दो नहीं बल्कि कई सारे ऐसे महानपुरूषो का जन्म हुआ है जिन्होंने न सिर्फ भारत बल्कि समस्त दुनिया को अपने ज्ञान से प्रकाशित किया है।

इनमे से एक नाम आर्यभट्ट का भी आता है जो की एक महान  गणितज्ञ, ज्योतिषविद और खगोलशास्त्री थे, इनके पास बहुत ज्ञान था और इन्होंने अपने जीवन को सफल बनाने के लिए किसी बाहरी दिखावे का उपयोग नहीं बल्कि अपने ज्ञान का उपयोग किया और फिर अपने ज्ञान से पूरी दुनिया को हैरान कर दिया।

आज अगर हम गणित को आसानी से समझ पा रहे है तो इसके पीछे का मुख्य कारण आर्यभट्ट ही है क्योंकि इन्होंने गणित से जुड़ी कई सारी खोज की और इसमें इनकी सबसे प्रसिद्ध खोज 0 यानी की शून्य की थी, इसके बाद हर कोई इनको एक महान गणितज्ञ मानने लगा।

अगर आप भी एक छात्र है या आपके मन में भी आर्यभट्ट जी से जुड़े कुछ सवाल है तो मैं आपको अपने लेख की सहायता से आर्यभट्ट जीवनी के बारे में विस्तार से बताऊंगा और मैं पूरी कोशिश करूंगा की आपको Aryabhatta Biography In Hindi से जुड़ी हर एक जानकारी सांझा कर पाऊं।

आर्यभट्ट का जीवन परिचय : Aryabhatta Biography In Hindi

Aryabhatta Biography In Hindi
जन्म         दिसंबर, ई.स.476
मृत्यु         दिसंबर, ई.स. 550 [74  वर्ष ]
जन्म स्थान         अश्मक,  महाराष्ट्र,  भारत
रचनायें         आर्यभटीय,  आर्यभट सिद्धांत
योगदान         पाई  एवं  शून्य  की  खोज

इनका जन्म दिसंबर, ई.स.476 को अश्मक,  महाराष्ट्र,  भारत में हुआ था, इन्होंने कई सारी खोज की और इनका मुख्य कार्यक्षेत्र गणितज्ञ,  ज्योतिषविद और खगोलशास्त्री था जिसके अंतर्गत इन्होंने कई रचनाएं जैसे की आर्यभटीय,  आर्यभट सिद्धांत की और साथ में कुछ खोज भी जैसे की पाई एवं शून्य की खोज।

आर्यभट्ट का प्रारंभिक जीवन

आपको जानकर हैरानी होगी की इनके जन्म का कोई ठोस प्रमाण किसी के पास नही है लेकिन ऐसा माना जाता है की भगवान बुद्ध के दौरान कुछ लोग मध्य भारत में नर्मदा नदी  और गोदावरी नदी के बीच में बसने के लिए आए थे और फिर आर्यभट्ट का जन्म स्थान भी इसी को माना जाता है यानी की ई.स.476 को अश्मक, महाराष्ट्र, भारत में इनका जन्म हुआ था।

कुछ लोगो का मानना यह भी है की आर्यभट्ट का जन्म बिहार के पटना में हुआ था जिसका पूर्व नाम पाटलिपुत्र था, जिसके समीप ही कुसुमपुर में इनका जन्म स्थान माना जाता है।

आर्यभट्ट जी की शिक्षा

जैसा की मेने पहले आपको बताया है की इनके जन्म से जुड़ा कोई ठोस प्रमाण नहीं है उसी प्रकार से आर्यभट्ट की शिक्षा से जुड़ा भी कोई ठोस प्रमाण हमारे पास नही है किंतु कुछ लोगो का मानना है की यह उस समय में एक उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से कुसुमपुर के एक प्रमुख विश्वविद्यालय गए थे।

आर्यभट्ट जी की मुख्य खोजे

Aryabhatta Biography In Hindi

जैसा की मेने आपको बताया है की इन्होंने अपने ज्ञान से न सिर्फ भारत बल्कि संपूर्ण दुनिया में अपने ज्ञान का प्रकाश उजागर किया है और इनकी कई सारी खोजे है जिनमे से कुछ निम्नलिखित है –

1: शून्य की खोज

आज अगर हम गणित को आसानी से समझ पा रहे है और गणित का उपयुक्त लाभ उठा पा रहे है तो इसके पीछे की मुख्य वजह आर्यभट्ट की शून्य खोज है क्योंकि इन्होंने ही शून्य की खोज की जो की गणित की सबसे बड़ी खोज में शामिल है और आज के समय में एक शून्य से ही पूरी संख्या की रूपरेखा बदल जाती है तो आप सोच सकते है की शून्य की खोज कितनी महत्वपूर्ण है और इन्होंने ने ही मानक पद्धति के बारे में संपूर्ण जानकारी दी है।

2: पाई की खोज

आपको बता दे की इन्होंने शून्य के अलावा पाई की खोज भी की है और इस खोज का जिक्र आपको आर्यभटीय के गणितपाद 10 में देखने को मिलता है जिसके अंतर्गत इन्होंने लिखा है की सौ  में  चार  जोड़ें,  फिर  आठ  से  गुणा  करें  और  फिर  62,000  जोड़ें  और  20,000  से  भागफल  निकालें,  इससे  प्राप्त  उत्तर  पाई  का  मान  होगा यानी की [ ( 4 + 100) * 8 + 62,000 ] / 20,000 = 62,832 / 20,000 = 3.1416

आर्यभट्ट से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

Aryabhatta Biography In Hindi

इनसे जुड़ी कई सारी बाते है जो की आपको हैरान कर देगी और इनमे से कुछ मुख्य रोचक तथ्य कुछ इस प्रकार हैं –

  • कुछ खास विद्वानों का मानना है की अरबी की रचनाएं ‘ अल – नत्फ़ ’ और  ‘ अल – नन्फ ’ आर्यभट्ट के कार्यों का ही अनुवाद है।
  • आर्यभट्ट जी ने एक निरक्षित शाला की स्थापना बिहार के तेलंगाना के सूर्य मंदिर में की थी।
  • आर्यभट्ट जी ने ही सूर्य सिद्धांत की रचना की।
  • आर्यभट्ट ने ही दशमलव प्रणाली का निर्माण किया है।
  • आपको बता दे की आर्यभट्ट के द्वारा रचित आर्यभटिय का उपयोग वर्तमान में भी हिंदू पंचांग के अंतर्गत देखने को मिलता है।

निष्कर्ष

भारत के महान विशेषज्ञ जिनको हम आर्यभट्ट के नाम से जानते है आर्यभट्ट ने जीरो यानि की शून्य की खोज की थी जो आज के समय में गणित में सबसे महत्वपूर्ण साबित हुआ है आज के आर्टिकल में हमने आपको Aryabhatta Biography In Hindi के बारे में डिटेल में जानकारी देने का प्रयास किया है यदि किसी व्यक्ति को हमारे इस आर्टिकल से जुड़ा हुआ कोई सवाल है तो आप हमें कमेंट में बता सकते है