कवि काग ‘कामप्रजाळण नाच करे’ हिंदी लिरिक्स

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Kam Prajalan Nach Kare Lyrics In Hindi: कवि काग बापू (Dula Bhaya Kag) गुजरात के चारण कवि थे। दुला भाया काग कवि का लिखा शिव तांडव स्तोत्र ‘कामप्रजाळण नाच करे’ काफी प्रसिद्ध हुआ है। इसकी तुलना रावण रचित ‘शिव तांडव स्तोत्र’ से की जाती है।

‘कामप्रजाळण नाच करे’ मूल रूप से गुजराती भाषा में लिखा गया है, इसका गायन अलग अलग लोगों द्वारा चारण शैली के साथ साथ विभिन्न शास्त्रीय रागों मे भी किया गया है। वर्तमान में मुक्तिदान गढवी का ‘कामप्रजाळण नाच करे’ पर आधारित हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे गीत काफी लोकप्रिय हुआ है।

Kam Prajalan Nach Kare Lyrics In Hindi

कामप्रजाळण नाच करे हिंदी में

।।दोहा।।
एक दिवस आनंद घर, हर हरदम हरखाय।
करन नाच तांडव कजु, बहु बिधि केफ बनाय।।१
घट हद ‘बिज्या’ घुंटिके, आरोगे अविनाश।
लहर केफ अनहद लगी, पूरण नृत्य प्रकाश।।२
लिय समाज सब संगमें, त्रयलोचन ततकाळ।
काळरुप भैरव कठीन, दिये ताळ विकराळ।।३
घोररुप घटघट भ्रमण, ऊतया-रमण अकाल।
कारण जीवको आक्रमण, दमण-दैत द्यग-भाल।।४
लख भैरव गण संग लीय, डाकीनी साकीनी डार।
जबर जुथ संग जोगणी, भूत प्रेत भेंकार।।५

।।छंद-दुर्मिला।।

परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,
भभके गण भूत भयंकर भुतळ, नाथ अधंखर ते नखते,
भणके तळ अंबर बाधाय भंखर , गाजत जंगर पांह गते ;
डमरुय डडंकर बाह जटंकर , शंकर ते कईलास सरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे, (1)

हडडं खडडं ब्रह्मांड हले, दडडं दडदा कर डाक बजे,
जळळं दंग ज्वाल कराल जरे , सचरं थडडं गण साज सजे ;
कडके धरणी कडडं , हडडं मुख नाथ ग्रजंत हरे ,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(2)

हदताळ मृदंग हुहूकट,हाकट धाकट धीकट नाद धरं,
द्रहद्राह दिदीकट वीकट दोक्ट,कट्ट फरंगट फेर फरं ;
धधडे नग धोम धधा कर धीकट,धेंकट घोर कृताळ धरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(3)

नट तांडवरो भट देव घटां नट उलट गूलट धार अजं,
चहँ थाक दुदूवट दूवट खेंखट,गेंगट भू कईलास ग्रजं ;
तत तान त्रिपुरारि त्रेकट त्रुकट, भूलट धुहर ठेक भरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(4)

सहणाई छेंछ अपार छटा,चहुथ नगारांय चोब रडे,
करताल थपाट झपाट कटाकट, ढोल धमाकट मेर धडे ;
उमया संग नाट गणं सरवेश्वर,ईश्वर ‘थईततां,’ उचरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(5)

पहरी गंगधार भेंकार भुजंगाय , भार अढारिंय वृक्ष भजे,
गडताळ अपार उठे पडघा,गढ सागर त्रीण ब्रह्मांड ग्रजे,
हदभार पगांय हिमाचळ हालत,हालत नृत्य हजार हरे ,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(6)

बह अंग परां धर खाख अडंबर डंबर सुर नभं दवळा,
डहके डहकं डहकं डमरु बह,डूहक डूहक थे बनळा ;
हदपाळ कराळ विताळरी हाकल, पाव उपाडत ताळ परे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(7)

ब्रह्मादिक देख सतं भ्रमना भर,सुर तेत्रीशांय पाव सबे,
खडडं कर हास्य ब्रह्मांड खडेडत,अंग उमा अरधंग अबे ;
जग जावण आवण जोर नचावण, आवत *काग* तणे उपरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(8)

।।छप्पय।।
करत नाच कइलास, पास लहि भूत प्रमेश्वर।
ओपत नभ आभास, खास मध भाल खयंकर।।
वार करण विश्वास, दास कुळ कमळ दिवाकर।
परम हिम चहुं पास, वास समशान विशंभर।।
दड दड दड डमरु बजे हास्य करत खड खड सु हर।
“काग” को संकट ‘धहवा’ कजू धम धम पद भर ‘गरलधर’।।

~~पद्मश्री दुला भाया “काग”

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About Journalist Dilip Soni: दिलीप सोनी वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया एक्सपर्ट है, द जैसलमेर न्यूज और जयपुर न्यूज टुडे के संस्थापक और मुख्य संपादक है।

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