कवि काग बापू रचित शिव तांडव स्तोत्र ‘हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे’ लिरिक्स

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Hartal Mridang Hukat Hakat Song Lyrics In Hindi: इन दिनों यूट्यूब शॉर्ट्स और फेसबूक इंस्टाग्राम रील्स पर वायरल ‘हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे‘ (Hartal Mridang Huhukat Hakat Shiv Tandav Stotra) का पूरा लिरिक्स हिंदी में आपके लिए लेकर आए है।

कवि काग बापु (दुला भाई काग) द्वारा विरचित भगवान शिव तांडव स्त्रोत मूल रूप

कवि काग बापु (दुला भाई काग) द्वारा विरचित भगवान शिव का तांडव स्त्रोत ‘कामप्रजाळण नाच करे’ डींगल साहित्य की दुर्लभ रचनाओ मे से एक है। चारण कवियों द्वारा छंद के रूप मे काव्य सृजन की परंपरा रही है।

यहां कवि काग बापु (दुला भाई काग) द्वारा विरचित भगवान शिव का तांडव स्त्रोत ‘कामप्रजाळण नाच करे’ मूल रूप दिया गया है।

।।दोहा।।
एक दिवस आनंद घर, हर हरदम हरखाय।
करन नाच तांडव कजु, बहु बिधि केफ बनाय।।१
घट हद ‘बिज्या’ घुंटिके, आरोगे अविनाश।
लहर केफ अनहद लगी, पूरण नृत्य प्रकाश।।२
लिय समाज सब संगमें, त्रयलोचन ततकाळ।
काळरुप भैरव कठीन, दिये ताळ विकराळ।।३
घोररुप घटघट भ्रमण, ऊतया-रमण अकाल।
कारण जीवको आक्रमण, दमण-दैत द्यग-भाल।।४
लख भैरव गण संग लीय, डाकीनी साकीनी डार।
जबर जुथ संग जोगणी, भूत प्रेत भेंकार।।५

।।छंद-दुर्मिला।।

परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,
भभके गण भूत भयंकर भुतळ, नाथ अधंखर ते नखते,
भणके तळ अंबर बाधाय भंखर , गाजत जंगर पांह गते ;
डमरुय डडंकर बाह जटंकर , शंकर ते कईलास सरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे, (1)

हडडं खडडं ब्रह्मांड हले, दडडं दडदा कर डाक बजे,
जळळं दंग ज्वाल कराल जरे , सचरं थडडं गण साज सजे ;
कडके धरणी कडडं , हडडं मुख नाथ ग्रजंत हरे ,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(2)

हदताळ मृदंग हुहूकट,हाकट धाकट धीकट नाद धरं,
द्रहद्राह दिदीकट वीकट दोक्ट,कट्ट फरंगट फेर फरं ;
धधडे नग धोम धधा कर धीकट,धेंकट घोर कृताळ धरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(3)

नट तांडवरो भट देव घटां नट उलट गूलट धार अजं,
चहँ थाक दुदूवट दूवट खेंखट,गेंगट भू कईलास ग्रजं ;
तत तान त्रिपुरारि त्रेकट त्रुकट, भूलट धुहर ठेक भरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(4)

सहणाई छेंछ अपार छटा,चहुथ नगारांय चोब रडे,
करताल थपाट झपाट कटाकट, ढोल धमाकट मेर धडे ;
उमया संग नाट गणं सरवेश्वर,ईश्वर ‘थईततां,’ उचरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(5)

पहरी गंगधार भेंकार भुजंगाय , भार अढारिंय वृक्ष भजे,
गडताळ अपार उठे पडघा,गढ सागर त्रीण ब्रह्मांड ग्रजे,
हदभार पगांय हिमाचळ हालत,हालत नृत्य हजार हरे ,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(6)

बह अंग परां धर खाख अडंबर डंबर सुर नभं दवळा,
डहके डहकं डहकं डमरु बह,डूहक डूहक थे बनळा ;
हदपाळ कराळ विताळरी हाकल, पाव उपाडत ताळ परे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(7)

ब्रह्मादिक देख सतं भ्रमना भर,सुर तेत्रीशांय पाव सबे,
खडडं कर हास्य ब्रह्मांड खडेडत,अंग उमा अरधंग अबे ;
जग जावण आवण जोर नचावण, आवत *काग* तणे उपरे,
परमेश्वर मोद धरी पशुपाळण,कामप्रजाळण नाच करे,(8)

।।छप्पय।।
करत नाच कइलास, पास लहि भूत प्रमेश्वर।
ओपत नभ आभास, खास मध भाल खयंकर।।
वार करण विश्वास, दास कुळ कमळ दिवाकर।
परम हिम चहुं पास, वास समशान विशंभर।।
दड दड दड डमरु बजे हास्य करत खड खड सु हर।
“काग” को संकट ‘धहवा’ कजू धम धम पद भर ‘गरलधर’।।

~~पद्मश्री दुला भाया “काग”

हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे लिरिक्स

ये शिव तांडव स्तोत्र ‘कामप्रजाळण नाच करे’ मूल रूप से गुजराती भाषा में प्रसिद्ध कवि काग बापू द्वारा लिखा गया था। इसी पर आधारित (Hartal Mridang Huhukat Hakat Shiv Tandav Stotra) ‘हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे’ को मुक्तिदान गढ़वी ने 2019 में धर्म डिजिटल के एलबम शिव चारणी आराधना के लिए गाया था।

2024 में ज्ञानवापी केस में कोर्ट का फैसला शिव मंदिर के पक्ष में आने पर सोशल मीडिया इसके वीडियो वायरल हुवे जिससे ये शिव तांडव स्तोत्र ‘हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे’ पूरे भारत में प्रसिद्ध हो गया।

Shiv Tandav Stotra- Hartal Mridang Hukat Hakat Song Lyrics in hindi

पण देवा……..

देवा सौ ना दास…..

अण विलासे वळु ध्याय करें…..

पण गंगा….. गंगा गोथां खाय..

ए ……एवो कोक जो जटाधर कागडा..

भभके गण भूत भयंकर भूतळ नाथ अधंतर ते नखते…

भणके तळ अंबर बाधाय भंखर गाजत जंगर पांहगते….

डमरुंय डडंकर… डडंकर.. डडंकर…

डमरुंय डडंकर बांह जटंकर शंकर ते कैलास सरे…

परमेश्वर मोद धरी पशुपालण काम प्रजाळण नाच करें…

हे जी काम प्रजाळण नाच करें…

हडडं खडडं ब्रह्मांड हले डडडं डडडा कर डाक बजे…

जळलं दंग जवाल कराल जरें सचरं थडडं गण साज सजे…

कड़के धरणी कडडं कडडं हडडं मुख नाथ ग्रजंत हरे…

परमेश्वर मोद धरी पशुपालण काम प्रजाळण नाच करें…

हे जी काम प्रजाळण नाच करें…

हे जी काम प्रजाळण नाच करें…

हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे…

द्रह द्राह दीदीकट विकट दोकट फट्ट फरंगत फैर फरे…

धधडे नग धोम धधाकट धिकट……

हड़ताळ मृदंग हुहुकट हाकट धाकट धीकट नाद धरे…

द्रह द्राह दीदीकट विकट दोकट फट्ट फरंगत फैर फरे…

धधडे नग धोम धधाकट धिकट..

चैंघट घोर कृताल धरे….

परमेश्वर मोद धरी पशुपालण काम प्रजाळण नाच करें…

जी काम प्रजाळण नाच करें…

“शंभो…”

शहनाई सेसाट अपार छटा चहुं थाट नगाराय चोब रडे …

करताल थपाट झपाट कटाकट ढोल धमाकट मेर घडे ..

उमीया संग नाच करें सर्वेश्वर ईश्वर ‘थईततां,’ उचरे….

परमेश्वर मोद धरी पशुपालण काम प्रजाळण नाच करें…

जी काम प्रजाळण नाच करें…

पण देवा……..

पण देवो नी आगळ दूत…

अन रुपाळा कायम रियें…

पण भेळा…

भेळा राखे भूत..

एवो तो कैलास वाळो कागड़ा..

नाचत नी शंका मृगमृग पंखा घममम घमका घुंघरू का..

ढोलुं का ढमका होवद हमका..

डम.. डम.. डम.. डम.. डम.. डम डीमाग डीम डीमाग डीम डीमाग..

हे डमडम डमकां डमरूं का रणतूर रणंका भेद भणंका गगन झणंका गहरेशा..

जयदेव.. जयदेव.. जयदेव सिद्धेशा हरण कलेशा मगन हमेशा.. माहेशा..

हे जी मगन हमेशा.. माहेशा..

हरिओम हर.. हर.. हर.. हर.. हर.. हर.. महादेव.. शंभो.. त्रिपुरारी जटाधर शंकर.. शंकर.. शंकर.. शंकर.. शंकर.. शंकर.. महादेव…

हरिओम हर हर ना ज्यां नाद त्यां शशिभाण उगे दिन रात..

तुज विण दिप “प्रदिप” ना वात..

शिव छो कण कण मां हयात..

शिव ने भजो दिन ने रात.. शिव ने भजो दिन ने रात..

शिव ने भजो दिन ने रात.. शिव ने भजो दिन ने रात..

शिव ने भजो दिन ने रात.. शिव ने भजो दिन ने रात..

शिव ने भजो दिन ने रात.. शिव ने भजो दिन ने रात..

Watch Full Video: Hartal Mridang Huhukat Hakat Shiv Tandav Stotra

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About Journalist Dilip Soni: दिलीप सोनी वरिष्ठ पत्रकार और मीडिया एक्सपर्ट है, द जैसलमेर न्यूज और जयपुर न्यूज टुडे के संस्थापक और मुख्य संपादक है।

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